खेती-किसानी किसान भाई बुवाई पूर्व बीजोपचार करें एवं पर्याप्त वर्षा होने पर करें बुवाई

राजगढ़ ब्यावरा (मप्र)खरीफ वर्ष 2021 में जिले में खरीफ फसलों की बुवाई के लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि विगत 2-3 दिन से थोडी-थोडी मात्रा में वर्षा जिले के अलग-अलग क्षैत्र में हो रही है। बुवाई के लिए वर्षा लगभग 3 से 4 इंच होने एवं जमीन में पर्याप्त नमी होने पर ही फसलों की बुवाई कर सकते है। बुवाई पूर्व बीज से उत्पन्न होने वाली बीमारियों एवं मृदा जनित रोगो से बचाव हेतु किसान भाई बीजो को फफूंदनाशक दवा जैसे थायरम $ कार्बेन्डाजिम (2रू1) 3 ग्राम प्रति किलो, इसके बाद पीला मोजेक रोग हेतु कीटनाशक थायोमिथाक्सम 30एफ.एस. 10 मिली. प्रति किलोग्राम बीज या एमिडाक्लोरोपिड 48 एफएस 1.2 मिली किलोग्राम बीज तथा अंत में कल्चर जैसे राईजोबियम एवं पीएसबी 5 से 7 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज से उपचारित कर बुवाई कर, ताकि भविष्य में फसल पर फफूंद जनित रोग से रोकथाम की जा सकती है।
उप संचालक कृषि श्री हरिष कुमार मालवीय ने बताया कि जिले में खरीफ सीजन में सोयाबीन फसल की प्रमुखता से बुवाई होती है तथा इसके बाद अधिकतर क्षैत्र में खरीफ प्याज एवं अन्य फसलों की बुवाई की जाती है। इन फसलों की लगातार दोनों सीजन में बुवाई से मिट्टी में उपलब्ध सल्फर एवं जिंक की मात्रा प्रायः कम देखी गई है। किसान भाईयो से अपील की जाती है कि, सोयाबीन की फसल बुवाई के पूर्व सल्फर युक्त उर्वरक जैसे सिंगल सुपर फास्फेट, जिप्सम, दानेदार सल्फर आदि का उपयोग कर सकते है तथा सोयाबीन की बुवाई हेतु रेजबेड प्लांटर अथवा गराड़ पद्धति से बुवाई करें, इस विधि की वुबाई में मोटी मेड़ एवं नाली का निर्माण होता है जिससे अधिक वर्षा होने की स्थिति में नाली से पानी का निकास हो जाता है एवं कम वर्षा होने की स्थिति में मोटी मेड़ से नमी संरक्षित रहने से फसल पर ताव नहीं लगता है। दोनों स्थिति में फसल पर विपरीत प्रभाव नहीं पडता है एवं सामान्य उत्पादन से 18 से 20 प्रतिशत की वृद्धि होती है तथा कीट एवं रोग का प्रकोप भी कम होता है। किसान भाई आगामी समय में सोयाबीन की बुवाई गराड पद्धति अथवा रेजबेड पद्धति एवं रिजफेरो पद्धति से बुवाई करें।

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राजगढ़ ब्यावरा