

मिठास और खुशबु में बेजोड राजगढ़ के संतरे को मिलेगी अलग पहचान
राजगढ़ (मप्र) आत्मनिर्भर भारत के तहत एक जिला एक उत्पादन (ओ.डी.ओ.पी.) अंतर्गत प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना पी.एम.एफ.एम.ई. माह दिसम्बर वर्ष 2020 से केन्द्र शासन द्वारा शुरू की गई है। योजनान्तर्गत राजगढ़ जिले के लिए ओ.डी.ओ.पी. अंतर्गत संतरा फसल शासन द्वारा प्रस्तावित की गई है। राजगढ़ जिले के 18,540 हेक्टेयर रकबे में लगभग 7-8 हजार कृषक संतरे का उत्पादन करते है। राजगढि़या (राजगढ़) का संतरा नागपुरी (नागपुर) संतरे से मिठास और खुषबु के मामले में कम नहीं है। व्यवसायी राजगढ़ के संतरे का नागपुरी संतरे के नाम से व्यवसाय करते है। कारण स्पष्ट है कि राजगढ़ के संतरे की फसल लेने वाले कृषक बंधु नागपुरी वेरायटी (किस्म) के पौधे ही लगाते है और अच्छा खासा मुनाफा भी कमाते है।
एक जिला एक उत्पाद योजनान्तर्गत राजगढ़ जिले में संतरा फसल से संबंधित लघु एवं सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाई हितग्राहियो द्वारा बैंक ऋण के माध्यम से स्थापित किए जाने पर कुल परियोजना लागत की 35 प्रतिषत सहायता राषि हितग्राही को दिए जाने का प्रावधान है। हितग्राहियों द्वारा किए जाने वाले आवेदन की प्रक्रिया पी.एम.एफ.एम.ई. पोर्टल पर ऑनलाईन है। वर्ष 2020-21 में उक्त योजना के तहत जिले को पांच लघु एवं सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाई स्थापित कराए जाने के लक्ष्य जिले को आवंटित किए गए थे। उक्त आवंटित लक्ष्यों के विरूद्ध छः इकाईयों के आवेदन पोर्टल के माध्यम से ऑनलाईन संबंधित बैंक शाखाओं को स्वीकृति हेतु प्रेशित किए गए है।
वर्ष 2021-22 हेतु जिले को 25 लघु एवं सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाईयों के लक्ष्य 5 मई, 2021 को प्राप्त हुए है। जिनका विकासखण्डवार लक्ष्य विभाजन किया जा कर लक्ष्य विकासखण्डो को आवंटित कर दिए गए है। विकासखण्ड प्रभारियों (एस.एच.डी.ओ.) एवं उनके अधिनस्थ क्षेत्रीय अधिकारियों (आर.एच.ई.ओ.) द्वारा अपने-अपने विकासखण्ड के संतरा फसल से संबंधित लघु एवं सूक्ष्म प्रसंस्करण इकाई प्रति स्थापित करने वाले हितग्राहियों के आवेदन पोर्टल पर ऑनलाईन दर्ज कराए जा रहे है। वर्तमान में जिले के पोर्टल पर कुल 49 आवेदन दर्ज है। इनमें से 31 आवेदन ड्राफ्ट की श्रेणी में आवेदक की आई.डी. पर सुधार एवं संषोधन हेतु लंबित है और सबमिशन की स्थिति में डी.आर.पी., डी.एल.सी. एवं बैंक शाखाओं में स्वीकृति हेतु 18 आवेदन लंबित है।
जिला प्रशासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्राप्त लक्ष्यों की पूर्ति हेतु प्रयास किए जा रहे हैं। शीघ्र ही लक्ष्य अनुसार प्रसंस्करण इकाईयां के आवेदन कराए जा कर बैंक ऋण स्वीकृति उपरांत लक्ष्यों की अतिशीघ्र पूर्ति की जाएगी। योजना के द्वारा जिले के संतरा उत्पादन करने वाले कृषक स्वयं के उत्पाद का वेल्यू एडीशन कर सकेंगे एवं स्वयं के द्वारा तैयार किए जाने वाले उत्पाद की ब्रान्डिंग कर स्वयं के ब्रान्ड के नाम से विक्रय कर अधिक लाभांश प्राप्त कर सकेगे। जिले के कृषक संतरे का अधिकतम लाभांश प्राप्त कर सकें, के उद्देष्य से जिला प्रशासन द्वारा उद्यानिकी विभाग के सौजन्य से संतरा उत्पादक 600 कृषकों एवं 20 आर.एच.ई.ओ. का माह जनवरी, 2021 में आयोजित खेत पाठ्षाला प्रषिक्षण सत्र में वैज्ञानिक डॉ. हच्चे एन.आर.सी. नागपुर द्वारा कीट व्याधि से बचाव एवं संतरे के अफलन के विषय विस्तृत प्रषिक्षण एवं सलाह दी जाकर उत्पाद की ब्रान्डिग के फायदे बताए गए हैं।
