
राजगढ़ :– कोई भी व्यक्ति माता-पिता के ऋण से पौराणिक नहीं सकता। बच्चों को बुजुर्गों के प्रति सम्मान के संस्कार घर से ही दिये जाना चाहिये ताकि किसी को वृद्धाश्रम में न आ पड़े। यह बात अंतराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर जिला चिकित्सालय परिसर स्थित आषाधाम वृद्धाश्रम में आयोजित वरिष्ठजन सम्मान समारोह में बोलते हुये प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय राजगढ़ श्री पी0सी0 गुप्ता ने कही। कार्यक्रम में वरिष्ठ अतिथि के रूप में जिला न्यायाधीश एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजगढ़ श्रीमती मीनल श्रीवास्तव भी उपस्थित थी। इस अवसर पर अपने उदबोधन में उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दी जा रही निःशुल्क सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी साथ ही माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण अधिनियम की भी जानकारी दी।
स्वागत भाषण समग्र अधिकारी सामाजिक न्याय श्री प्रदीप ने दिया एवं अतिथियों का स्वागत वृद्धाश्रम परिवार द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों द्वारा आश्रम में निवासरत वृद्धजनों का सम्मान पुष्पाहारों द्वारा किया गया एवं उपहार स्वरूप नवीन वस्त्र आश्रम की ओर से प्रदाय करवाये गये। इस अवसर पर आश्रम में निवासरत वृद्धा श्रीमती बसंती बाई को जिला विकलांग एवं पुर्नवास केन्द्र की ओर से नवीन व्हील चेयर प्रदान करवाई गई। कार्यक्रम में जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री फारूक अहमद सिददीकी, हेल्पऐज इंडिया फाउंडेशन के नीलेश जोशी, श्री प्रमोद श्रीवास्तव, श्रीमती कांता बैस, श्री देवेन्द्र विजय आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी श्री ओ.पी. विजयवर्गीय ने किया एवं आभार श्री कमलकांत परीडा ने माना।
