मध्यप्रदेश देश का हृदय स्थल इसके स्पंदन को पहचानना चाहिए – राजेंद्र शर्मा


मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर अंबेडकर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी
प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण उसके क्षरण होने से पूर्व आवश्यक – मनोज श्रीवास्तव

महू। मध्यप्रदेश ने अपने गठन के उपरांत अपनी नई छवि का निर्माण किया है, कृषि और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हम देश में अग्रणी हैं। शिक्षा, पुरातत्व, पर्यटन और संस्कृति में भी प्रदेश आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश देश का हृदय है इसके स्पंदन को महसूस किया जा सकता है, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों का प्रदेश के विकास में अपना-अपना विशिष्ट योगदान हैं लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सबसे भाग्यशाली हैं और उन्हें सबसे अधिक समय मिला है साथ ही भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं और मंत्रियों की टीम भी मिली है, आज उनकी योजनाएं केंद्र और राज्य सरकारें अपना रही हैं उक्त विचार स्वदेश पत्र समूह के प्रधान संपादक श्री राजेंद्र शर्मा जी ने “मध्यप्रदेश की विकास गाथा” वेबीनार में व्यक्त किए। जिसका आयोजन डा. बी आर अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय ने मध्यप्रदेश की स्थापना दिवस के अवसर पर किया था। श्री शर्मा ने कहा कि प्रदेश मैं इकत्व के भाव का विकास होना चाहिए उन्होंने कहा इस दृष्टि से भी विचार किया जाना चाहिए कि 75 में स्थापना दिवस के समय मध्य प्रदेश कैसा होगा उन्होंने एक विशेष बात का भी उल्लेख किया कि चित्रकूट से अमरकंटक होते हुए बस्तर तक भगवान राम का वन गमन मार्ग चिन्हित कर उसे पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित किया जा सकता है। इसी अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के पूर्व अपर मुख्य सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि आज मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को क्षरण और विघटित होने से पूर्व संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान 1956 से नहीं है, इसका इतिहास लाखों वर्ष पुराना है जिसका उल्लेख वेदों में और मनु स्मृतियों में मिलता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में नर्मदा घाटी की सभ्यता सिंधु घाटी की सभ्यता से भी प्राचीन है। अमरकंटक में 6 करोड़ वर्ष प्राचीन जीवाश्म हैं, मध्यप्रदेश में सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग के समय के सांस्कृतिक क्षेत्र हैं जिनका संरक्षण करने की आवश्यकता है। यह पर्यटन और आर्थिक समृद्धि का आधार बन सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 34 जिलों में अति प्राचीन शैल चित्रों को देखा गया है साथ ही इस बात का भी उल्लेख किया कि मध्यप्रदेश में जिद्दी जातिवाद, श्रमिक असंतोष जैसी अनेक बीमारियां कम है, प्रदेश में इंसाइडर और आउटसाइडर का झगड़ा नहीं है यह तुलनात्मक रूप से शांत और समन्वयकारी प्रवृत्तियों के साथ स्पर्धी स्वभाव का है। वेबीनार में राष्ट्रवादी पत्रकारिता के लिए समर्पित रहे वरिष्ठ पत्रकार श्रीराम भुवन सिंह कुशवाहा ने कहा कि श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मध्यप्रदेश का विकास श्रेष्ठ ढंग से हो रहा है तथा शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रदेश तरक्की कर रहा है।
मध्यप्रदेश के सूचना आयुक्त वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय मनोहर तिवारी ने इजराइल में विकास की अवधारणा और वहां के राजनेताओं की प्रवृत्ति का विश्लेषण करते हुए कहा कि भारत में गांव कस्बे की ओर, कस्बे नगर की ओर, नगर महानगर की ओर जा रहे हैं इससे आबादी का सम्बन्ध जमीन और गांव से छूट रहा है ऐसे शहरीकरण को नियंत्रित करने की आवश्यकता है इसके लिए ऐसे विकास की आवश्यकता है जिससे गांव मजबूत हो सके और लोग वापस जा सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वच्छता के क्षेत्र में भी काम हुआ है एक समय इंदौर की खान और सरस्वती नदी विलुप्त होकर नाले में बदल गई थी, विगत 8-10 वर्षों में इंदौर में सफाई के क्षेत्र में काम करते हुए देश में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। श्री तिवारी ने भी पर्यटन और सांस्कृतिक क्षेत्रों के विकास में प्राथमिकता से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डा. बी आर अंबेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय महू की कुलपति प्रोफेसर आशा शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति कर रहा है प्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाला देश का पहला प्रदेश है उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में जेंडर समानता व महिला सशक्तिकरण के कोर्स को सभी विश्वविद्यालयों में लागू किया गया है। उन्होंने विश्वविद्यालय में होने वाले विकास कार्यों के साथ-साथ शिक्षा के गुणात्मक विकास के लिए किए जाने वाले शोध कार्यों से अवगत कराते हुए कहा कि जो लोग नेतृत्व करते हैं उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वाह करने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी। संगोष्ठी का संचालन और आभार प्रदर्शन ब्राउस के परामर्शी डॉ सुरेंद्र पाठक ने किया। इस अवसर पर ब्राउस निदेशक डॉ डी के वर्मा , अधिष्ठातागण सहित विभिन्न संकायों के शिक्षकों और विद्यार्थियों की सहभागिता देखी गई।

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