राम और कृष्ण बनने की नीव है विद्यारंभ संस्कार-डॉ. अग्रवाल

ब्यावरा/राजगढ़:–बसंत पंचमी के पावन अवसर पर सुठालिया रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी माँ सरस्वती के प्राकट्योत्सव बसंत पंचमी पर्व पर भारतीय संस्कृति अनुसार 16 संस्कारों में से एक विद्यारंभ संस्कार व यज्ञ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई इसके उपरांत चारों वेदों की शोभा यात्रा निकाली गई। जिसमें नन्हे-मुन्ने भैया/बहिनों ने चारों वेदों को अपने सिर पर रख शोभा यात्रा निकाली शोभायात्रा के उपरांत वेदों की माता सरस्वती व वेदों का पूजन किया गया।
इसके उपरांत विद्यालय सभागृह में यज्ञ का आयोजन किया गया जिसमें गायत्री परिवार के प्रतिनिधि द्वारा यज्ञ एवं मंत्रोच्चार के साथ स्लेट पर ब्रह्म-अक्षर ‘ऊँ’ लिखवाकर विद्यार्थी जीवन में प्रवेश ।
यज्ञ उपरांत विद्यालय द्वारा नन्हे भैया बहनों को स्लेट, पट्टी-पहाड़ा व कलम भेंट स्वरूप दी गई। विद्यालय की दीदी द्वारा अभिभावक व नन्हे-मुन्ने भैया/बहनों को शिशु वाटिका की 12 व्यवस्थाओं का अवलोकन कराया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ अशोक अग्रवाल ने बताया कि किस प्रकार सतयुग,त्रेता युग एवं द्वापर युग में बसंत पंचमी पर लोग विद्यारंभ संस्कार किया करते थे।इसके साथ ही उन्होंने भारत के गौरवशाली इतिहास से सभा में उपस्थित समस्त अभिभावकों को परिचित कराया।

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि श्री रामबाबू जी मेवाड़े (रा.स्व. संघ के मा.नगर संघचालक) व विशेष अतिथि के रूप में डॉ. डी. के. गुप्ता (विद्यालय प्रबन्ध कार्यकारिणी के सदस्य)उपस्थित रहे।इस अवसर पर विद्याभारती मध्यभारत प्रांत के सह सचिव चंद्रकांत त्रिपाठी, समिति के सचिव अशोक जी दांगी, सह-सचिव मुकेश सेन सहित विधालय पदाधिकारी एवं गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

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